
मनोज वर्मा, केरेडारी के कलम से…
15 अगस्त, 1947 वह तारीख है, जो भारतीय इतिहास में सुनहरे अक्षरों के साथ अंकित है। यह वो दिन था जिसके बाद पहली बार भारत के लोगों ने एक स्वतंत्र देश में सांस ली। यह वो दिन था जब भारत के लोगों को उनके वाजिब अधिकार मिले, या फिर यूं कहें तो यह वो दिन था जिस दिन इस देश की मिट्टी, धूल, नदियां, पहाड़, जंगल, आबोहवा और बच्चा-बच्चा आजाद हुआ था। यानी सीधे शब्दों में समझें, तो हमारे देश भारत को इसी दिन 200 साल के अंग्रेजी हुकूमत से आजादी मिली थी। आजादी पाने के लिए देश वासियों ने लंबा संघर्ष किया। वीरो ने अंग्रेजी हुकूमत के अत्याचारों का सामना किया, कइयों ने चोट खाई, कई शहीद हुए, कइयों ने मुस्कुराते हुए फांसी के फंदे को चूम कर गले से लगा लिया, तो कइयों ने अपना पूरा जीवन, अपनी पूरी जवानी इस आजादी को पाने में झोंक दी।

भारत माँ के इन सच्चे सपूतों के त्याग तथा बलिदान के कारण स्वतंत्रता का सपना साकार हुआ। भारत के मिट्टी के लालों और ललनाओं की इसी सरफ़रोशी की नियत की वजह से ही आज हम सब सिर उठा कर खुली हवा में लहराते हुए तिरंगे को देख पा रहे हैं। तभी तो 15 अगस्त, 1947 का जिक्र होते ही गर्व से हर भारतीय का सीना चौड़ा हो उठता है।
स्वतंत्रता दिवस का हर भारतीय के लिए विशेष महत्व सिर्फ इसलिए ही नहीं है क्योंकि इस तारीख को उनका देश आजाद हुआ था, बल्कि इसलिए भी है क्योंकि इस दिन के बाद ही पहली बार उन्हें उनके मौलिक अधिकार मिले। शिक्षा का, न्याय का अधिकार मिला। यह दिन देशभर के लोगों के अंदर एक राष्ट्रवादी भावना पैदा करता है तथा भारत जैसे विविधता भरे देश में उनके अंदर एक राष्ट्र की अवधारणा के साथ एकजुट रहने को प्रेरित करता है। यह महज एक राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि हमारी तरफ से उन वीर सपूतों को श्रद्धांजलि भी है, जिन्होंने इस देश को आजाद करवाने में अपना तन, मन और धन सबकुछ त्याग दिया। फिर चाहे वो रानी लक्ष्मी बाई हों, शहीद भगत सिंह हों या फिर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी। इन सभी का सपना एक आजाद भारत था और जो उनके शहीदी पर आज हम उनके सपनों के भारत में आजाद है।
यह दिन इसलिए भी खास है क्योंकि इससे हमारी वर्तमान पीढ़ी अपने पूर्वजों के द्वारा किए गए आजादी के संघर्ष से परिचित होती है और उसे इस बात का एहसास होता है कि आजादी जाने-अनजाने में राह पर पड़ा हुआ कोई सिक्का नहीं जो किस्मत से मिलती है, बल्कि यह वो हक है, जिसे पाने के लिए अगर हमें अपना सबकुछ भी दांव पर लगाना पड़े, तो भी इससे गुरेज नहीं करना चाहिए।
इस दिन लहराते तिरंगे को देखते हुए और राष्ट्रगान गाते हुए जब हमारे सैनिक, हमारे शहीद हमें याद आते हैं, तो हमारे अंदर अद्वितीय रूप से देशभक्ति व राष्ट्रभावना का संचार होता है। ऐसे में भारतीय स्वतंत्रता दिवस का महत्व इतना ज्यादा है कि इसकी महत्ता को चंद शब्दों में बयान किया जाना मुमकिन ही नहीं है।
Author: news24jharkhandbihar
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