अब मिला सड़क, बिजली की समस्या से निजात
अरुण यादव/ केरेडारी
मैं हूँ केरेडारी… आजादी के 76 वर्ष के शानदार सफर का नतीजा है कि अब यहां बिजली, पानी और सड़क के लिये कोई आंदोलन नही होता। केरेडारी विकास के पथ पर लगातार बढ़ता चला है। एक लाख 40 हजार की आबादी वाले इस प्रखंड में सभी पंचायतों में विकास का कार्य पुर जोर तरीके से चल रहा है। चार बेचिरागी समेत 76 गांव को सड़क मार्ग से पंचायतों को जोड़ दिया गया। सुदूरवर्ती लोहरा गांव में भी बिजली जल रही है। केरेडारी में एक प्लस टू हाई स्कूल, एक कस्तूरबा, 6 राजकीयकृत मध्य विद्यालय, 5 उत्क्रमित हाई स्कूल, 28 उत्क्रमित मध्य विद्यालय, 5 प्राथमिक विद्यालय, 60 नव प्राथमिक विद्यालय, एक मदरसा स्कूल है। +2 की व्यवस्था के करना अब केरेडारी के बच्चों को इंटर तक कि पढ़ाई गांव में ही होगा। स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी प्रखंड के लोगों की समस्या का निदान हुआ है।
प्रखंड में एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 11 स्वास्थ्य उपकेंद्र हेंदेगिर, बुंडू, सलगा, कंडाबेर, गर्रीकला, हेवई,मनातू, बेलतु, पचड़ा, पगार, गोपदा में स्थित है। जहां ग्रामीणों का प्राथमिक उपचार की व्यवस्था है। वहीं प्रखंड के कुल 91 आंगनबाड़ी में हर पांच किलोमीटर की दूरी पर आठ केंद्र में हर गुरुवार और शनिवार को नवजात बच्चों व गर्भवती महिलायों को टीकाकरण के लिये जिला मुख्यालय या निजी अस्पताल में नही जाना पड़ता, प्रसव के लिये यहाँ ट्रेंड नर्स हैं। क्षेत्र से मरीजों को लाने के लिये फ्री में ममता वाहन की सुविधा है।

काम के तलाश में बाहर गए प्रवासी मजदूर, लौट रहे है गांव
केरेडारी के लोग जो रोजगार की तलाश में महानगरों में पलायन कर रहे थे। अब लोग वापस लौटने लगे हैं और पलायन भी रुक गया है। इसका वजह क्षेत्र में खुल रहे कम्पनियां हैं। नॉर्थ कर्णपुरा ताप विद्युत परियोजना टंडवा, एनटीपीसी के चट्टीबारियातु कोल माइंस, केरेडारी कोल माइंस में सैकड़ों लोगो को रोजगार मिला है। तीन दशक पहले लोग केरेडारी चौक में सात बजे के बाद ठहरने का नाम नही लेते थे। लेकिन अब देर रात तक चौक पर मार्केटिंग करते लोग नजर आते हैं। इसलिये मैं वही केरेडारी हूँ जहां लोग नक्सलियों के भय से आना नही चाहते थे आज बड़े पैमाने पर प्रवासी रोजगार के तलाश में यहां पहुँचे हैं। अंगांतुक भी निर्भीक व भयमुक्त होकर क्षेत्र में भ्रमण करते हैं।

Author: news24jharkhandbihar
सबसे तेज, सबसे आगे





