भटक कर जिंदगी की जंग हारते दिख रहे हैं युवा पीढी,आखिर क्यों हो रही है ऐसी घटना, पढ़े पूरी खबरे..

राजू यादव

टाटीझरिया (हजारीबाग)। आज के परिवेश में युवाओं के द्वारा की जा रही खुदकुशी का मामला हमारे समाज के लिए चिंतनीय बन गया है। टाटीझरिया निवासी केदार यादव (25 वर्ष) की खुदकुशी की खबर से क्षेत्रवासी सदमे से उभर नहीं पा रहे हैं। केदार यादव की पत्नी माया देवी ने थाना में आवेदन देकर प्रखंड क्षेत्र की ही दो महिलाओं को उनके पति को मांसिक प्रताडना देकर आत्महत्या के लिए मजबूर करने का आरोपी बनाया है। पिछले महीने भी सदारो बाजार टांड से ऐसा ही मामला सामने आया था। जहां एक विवाहित युवक ने जहर खाकर अपनी इहलीला समाप्त कर लिया था। ये घटनाएं लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर क्यों इस अनमोल जिंदगी को आज की ये युवा पीढ़ी इतनी आसानी से बर्बाद कर रहे हैं। इसका यह कारण भी है कि स्कूलिंग के दौरान ही अपरिपक्व बच्चे क्षणिक खुशी की प्राप्ति में भटक रहे हैं। अभिभावक भी इस भागदौड़ भरी जिंदगी में सबकुछ देख-सुनकर भी नजरअंदाज कर देते हैं या फिर उन्हें शुरुआत में ही सही दिशा में लाने का प्रयास तक नहीं करते। आज हर कस्बे-मुहल्ले में प्रायः 20 से 30 वर्ष उम्र के बच्चे नशाखोरी में बहुत बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं, आज स्कूल-कॉलेज में इसका चलन बहुत तेजी से चला है। बच्चे धडल्ले से मादक पदार्थों का सेवन कर रहे हैं। इससे उनमें चिढचिढापन की प्रवृत्ति विकसित हो रही है। भटक कर गलत मार्ग अपनाने के बाद वह अंदर से इतने कमजोर हो जाते हैं कि अपनी जिंदगी को ही समाप्त करने की ठान लेते हैं। यह कदम उठाने के बाद परिवार के समक्ष परेशानी इस कदर बढ जाती है कि हमेशा के लिए वह हासिए पर चले जाते हैं। हालांकि इस युवा पीढी को समय रहते मुख्यधारा पर लौटना होगा। गम और खुशी जीवन में आते-जाते रहते हैं। यह सोचना होगा कि जिंदगी कुदरत का दिया अनमोल तौहफा है और किसी भी समस्या का समाधान खुदकुशी कभी भी नहीं हो सकता।

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Author: news24jharkhandbihar

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