दो सौ वर्षों का है इतिहास, दरबार में आने वाले भक्त नहीं लौटते है खाली हाथ
केरेडारी। हजारीबाग जिला मुख्यालय से 40 किलो मीटर दूरी में स्थित केरेडारी प्रखंड के पेटो पंचायत के झाबर गढ़ा प्राचीन बुढ़िया माता का मंदिर आस्था और विश्वास का केंद्र हैं। यहां पूजा अर्चना करने वाले भक्तों का मुरादे पूरी होती है। इनके दरबार में दूर दूर से लोग दर्शन करने पहुंचते है।
केरेडारी मुख्यालय से 7 किमी दूरी में है स्थित है माता का मंदिर
बुढ़िया माता मंदिर का इतिहास 200 साल पुराना है। 200 साल पहले गांव के ही गजन साव ग्रामीणों के सहयोग से बुढ़िया माता के दरबार में झोपड़ी नुमा मंडप बनाये थें। भक्त उस दौर में मंडप में पूजा अर्चना करते थे। साथ ही हर नवरात्रा में अखंड दीप जला कर मां की आराधना करते थे। दौर समय दर समय बदलता गया। वर्तमान समय में भक्तो ने 1.50 करोड़ रुपया के लागत से मंदिर का निर्माण किए है। मुखिया कौशल्या देवी वा समाज सेवी गुरुदयाल साव के द्वारा मंदिर के गुंबद में 7 पितल का कलश वा त्रिशूल का सहयोग किए। बुढ़िया माता मंदिर केरेडारी प्रखंड मुख्यालय से 7 किमी दूरी में स्थित हैं जबकि चतरा जिला के टंडवा प्रखंड मुख्यालय से 3 किमी दूरी में स्थित है। आने जाने के पक्का सड़क हैं। श्रद्धालुओं टंडवा में ठहरने के उत्तम व्यवस्था है।

बुढ़िया माता ने गजन साव को दिए थे दर्शन, आज भी परिवार वाले चढ़ाते है चढ़ावा
भक्तों ने बताया कि बुढ़िया माता ने गजन साव को दर्शन दिये थे। उस समय मंदिर परिसर में काफी घना जंगल था। ग्रामीणों के साथ चर्चा कर गजन साव ने सबसे पहले मंडप बना कर पूजा अर्चना शुरू किया। आज भी इनके परिवार के सदस्यों के द्वारा दुर्गा पूजा नवरात्र के दिन घर से प्रसाद बनाकर चढ़वा करते है।
क्या कहते हैं मंदिर के पुजारी दिनेश मिश्रा बुढिया माता मंदिर के पुजारी दिनेश मिश्रा कहते हैं कि आदि शक्ति बुढिया मां के रूप में गजन साव को दर्शन दिए थें। मंदिर निर्माण और पूजा अर्चना की बात कह कर ब्रह्मलीन हो कर शीला (पिंडी) के रूप में विराजमान हैं। रोजाना कई भक्त पूजा अर्चना के साथ मन्नत मांगने मां के दरबार पहुंचते हैं। मंदिर में पूजा अर्चना से भक्तों की मनोकामनायें पूर्ण होती है।
Author: news24jharkhandbihar
सबसे तेज, सबसे आगे





