दौना गांव में स्वच्छ पेयजल के लिए तरस रहे है लोग, 761 परिवार का जीवन नदी और चुआड़ी पर निर्भर

महुआडांड़। झारखंड अलग राज्य बनने के बावजूद दौना गांव में स्वच्छ पेयजल के लिए लोग तरस रहे है। बरसात में यहां की हलात और भी बुरी हो जाती है, लोग प्रकृतिक जल स्रोत नदी और चुआड़ी पर निर्भर जंगल क्षेत्र में रहने वाले आदिवासी एवं अन्य समुदाय के परिवार बारिश का पानी पीने को मजबूर है। दूसरी ओर सरकार के द्वारा जल जीवन मिशन के तहत हर घर नल जल योजना के तहत स्वच्छ पेयजल पहुंचाने दावा खोखला साबित हो रहा है। दौना गांव में आज तक नल जल योजना पहुंचा ही नही। दौना गांव की पूरी आबादी मात्र तीन चापानल के भरोसे है। यहां की आधी आबादी बिरिजाया समुदाय चुवां वा डाड़ी पर पेयजल के लिए निर्भर है।

दौना गांव दूरूप पंचायत में स्थित है, दौना में 2011 जनगणना अनुसार जनसंख्या 761 लोग निवास करते है। यहां के लोग सभी मौसम में गांव से दूर डाड़ी ( चुआड़ी ) से अपने जरूरतों को पूरा करते है। कई दशको से लोग पेयजल समेत अन्य पानी की जरूरत इसी डाड़ी से पूर्ति करते है।

इस संबंध में उप प्रमुख सह बिस सूत्री अध्यक्ष अभय मिजं ने कहा कि आदिम जनजाति समुदाय को पानी के लिए बहुत ही दिक्कत हो रही है। जल्द ही समस्या का समाधान किया जाएगा ताकि आदिम जनजाति समुदाय के लोगों को पानी के लिए- भटकना ना पड़े।

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Author: news24jharkhandbihar

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