आदिवासी संस्कृति प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने का पाठ सिखाता हैं – डॉ. एम के जोस

सूरज कुमार/ महुआडांड़

विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर संत जेवियर्स महाविद्यालय, महुआडांड़ में आदिवासी महोत्सव का अयोजन किया गया। महोत्सव का शुभांरभ प्राचार्य फादर डॉ एम के जोस, एआईसीयूएफ कॉर्डिनेटर डॉ राजिप तिर्की ने दीपप्रज्वलित कर किया। अलका किंडो ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया।

इस अवसर पर प्राचार्य एमके जोश ने कहा की आदिवासी परंपरा और दर्शन हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने का पाठ सिखाता है। उन्होंने दुःख जाहिर करते हुए कहा की वर्तमान समय में आदि वासियत पर हमला जारी है। जल, जंगल और जमीन आदिवासी जीवन का आधार है । लेकिन उनका स्वामित्व छीन चुका है। हम सभी आपसी एकता और सहयोग से ही आदिवासी अस्मिता, पहचान, भाषा, संस्कृति और धर्म, परंपरा को बचा सकते हैं। छात्र पेट्रूस आईंद ने कहा की आदिवासियत को सम्मान और संरक्षण की आवश्यकता है। महाविद्यालय परिसर पूरी तरह से आदिवासी गीत और नृत्य से झूम उठा। इस अवसर पर आदिवासी नृत्य प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया था। जिसमें दर्जनों जनजातियों के मनमोहक नृत्य शैली देखने को मिली। नृत्य प्रतियोगिता के निर्णायक मंडली में डॉ. प्यारी कुजूर, डॉ. राजिप तिर्की और नीतू मिंज सामिल थे। नृत्य प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार ट्विंकल एंड ग्रुप, द्वितीय पुरस्कार संयुक्त रूप से आलोक दीप एंड अनुराधा ग्रुप, तृतीय पुरस्कार अभिता एंड ग्रुप को प्रदान किया गया।

इस महोत्सव का अयोजन ऑल इंडिया कैथोलिक यूनिवर्सिटी फैडरेशन के बैनर तले किया गया। कार्यक्रम के सफल आयोजन और संचालन के लिए जयवंत कुजूर ने प्राचार्य, शिक्षकों, कर्मचारियो और विद्यार्थियों का हृदय से आभार प्रकट किया। कार्यक्रम का संचालन ज्योति तिर्की और मनजीत कुजूर ने किया। इस अवसर पर मुख्य रूप से सिस्टर कैसलिन जुलियट, अभय सुकुट डुंगडुंग, रीमा रेणु, अमृत मिंज, रोज एलिस, दिव्या शोभा, सुबोध मिंज, रश्मी सुमन टोप्पो, सेफाली प्रकाश, अस्मिता तिग्गा आदि उपस्थित थे।

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Author: news24jharkhandbihar

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