बड़कागांव रक्तदान शिविर में जबरन रक्तदान करने व कर्मचारी के साथ बदसलूकी करने पर परिजनों ने किया हंगामा

लगभग 40 से 45 मिनट के मान मनौवल का चला बैठक

प्रताड़ित हुए कर्मचारी सहकर्मियों के सामने फफ़क फफ़क कर रोने लगे

बड़कागांव–झारखंड सरकार द्वारा 12 नवंबर से लेकर 28 नवंबर तक पूरे राज्य भर में रक्तदान शिविर लगाने का कार्यक्रम तय की गई है। इसी कार्यक्रम के तहत हजारीबाग स्वास्थ्य विभाग के सौजन्य से मंगलवार को बड़कागांव समुदाय स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सा प्रभारी डॉक्टर अविनाश कुमार के नेतृत्व में रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया था। जिसमें कई कर्मचारी पर प्रभारी डॉक्टर अविनाश कुमार के द्वारा दबाव बनाकर जबरन रक्तदान कराया गया था। जिसको लेकर समुदाय स्वास्थ्य केंद्र के कई कर्मचारी दबे आवाज में इसका विरोध कर रहे थे परंतु आज दिन बुधवार को दबाव में रक्तदान करने के लिए बोलने और बदसलूकी करने के मामले का उजागर तब हो गया जब दोपहर लगभग 3:30 बजे बड़कागांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लगभग 58 वर्षीय चतुर्थवर्गीय बुजुर्ग कर्मचारी वरुण पांडे के परिजन बड़कागांव समुदाय स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर प्रभारी डॉ अविनाश कुमार को ढूंढते हुए हो हंगामा करने लगे। और कहने लगे की कहां गए हैं चिकित्सा प्रभारी जो हमारे पिताजी के साथ बदसलू किए हैं और उनको बीपी का बीमारी होने के बावजूद भी जबरन रक्तदान करने बोल रहे थे और उनके साथ बदसूकुली किया। चिकित्सा प्रभारी अस्पताल परिसर में नहीं मिले तो किन्ही ने जानकारी दिया कि वह बड़कागांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लगभग 150 – 200 मीटर दूर अपने पर्सनल क्लिनिक पर बैठकर मरीजों का इलाज कर रहे थे। तभी वरुण पांडे के परिजन वहां पहुंचकर हो हंगामा करने लगे तब प्रभारी डॉक्टर अविनाश कुमार ने कहा कि चलिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा प्रभारी के ऑफिस में जाकर बात करेंगे। तब चिकित्सा प्रभावी डॉक्टर अविनाश कुमार एवं वरुण पांडे के परिजन पैदल ही जाने लगे और जाते-जाते सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के कैंपस में हो हंगामा शुरू हो गया। इसी हो हंगामा का पत्रकारों के द्वारा वीडियो बनाएं जाने लगा जिस पर चिकित्सा प्रभावित डॉक्टर अविनाश कुमार ने पत्रकारों से भी अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए रिकॉर्डिंग करने पर हस्तक्षेप करने लगे। तत्पश्चात डॉ अविनाश कुमार एवं प्रताड़ित हुए चतुर्थवर्गीय कर्मचारी वरुण पांडे एवं उनके परिजनों के साथ लगभग 40 से 45 मिनट का मान मनौवल की बैठक की गई। बावजूद इसके चतुर्थवर्गीय कर्मचारी वरुण पांडे के परिजनों में प्रभारी डॉक्टर अविनाश कुमार के प्रति आक्रोश देखा गया। वही कुछ कर्मचारियों ने नाम नहीं छापने के शर्त पर बताया कि सचमुच चिकित्सा प्रभारी के द्वारा वरुण पांडे के साथ दुर्व्यवहार किया गया था। साथ ही साथ अन्य कर्मचारियों के साथ भी दुर्व्यवहार करते हुए जबरन रक्तदान करने का दबाव बनाया गया था। प्रताड़ित होने के बाद वरुण पांडे अपने सहकर्मियों के सामने आकर फफक फफ़क कर रोने लगे थे। वहीं सूत्रों की माने तो महिला कर्मचारियों पर भी दबाव बनाकर रक्तदान करवाया गया। और चिकित्सा प्रभारी डॉक्टर अविनाश कुमार दूसरों को तो जबरन रक्तदान करने के लिए दबाव बन रहे थे परंतु वह खुद रक्तदान नहीं किए।

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Author: news24jharkhandbihar

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