अनुज कुमार यादव
बड़कागांव। एनजीटी द्वारा हर साल 10 जून से 15 अक्टूबर तक देशभर की नदियों से बालू खनन पर रोक लगाई जाती है। बावजूद इसके बड़कागांव अंचल क्षेत्र में आधा दर्जन से अधिक बालू स्टॉक यार्ड बेखौफ तरीके से संचालित हो रहे हैं। हहारो नदी, सोनपुरा और पलांडु नदी किनारे बने इन स्टॉक यार्डों में नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए न तो स्टॉक की वास्तविक स्थिति का बोर्ड लगाया गया है और न ही चालानों का कोई पारदर्शी हिसाब रखा जा रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार रात के अंधेरे में नदियों से बालू निकालकर इन यार्डों में जमा किया जाता है और फिर हाईवा, ट्रक व ट्रैक्टरों के जरिए हजारीबाग, रामगढ़ जैसे शहरों तक भेजा जाता है। एक चालान पर दो-दो ट्रिप कर विभाग को चकमा देने का खेल आम बात हो चुकी है। बताया जाता है कि हर रात यहां दो से तीन दर्जन ट्रैक्टर, आधा दर्जन ट्रबो और 25-30 हाईवा अवैध ढुलाई में शामिल रहते हैं। आरोप है कि विभागीय गश्ती दल और जिम्मेदार अधिकारी भी इस गोरखधंधे पर आंख मूंदे रहते हैं। यही कारण है कि लाल बालू का काला कारोबार लगातार फल-फूल रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की चुप्पी ने हालात और गंभीर कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जिन अधिकारियों से कार्रवाई की उम्मीद की जाती है, वही अवैध कारोबारियों से मिलीभगत कर बैठे हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते रोकथाम नहीं हुई तो आने वाले वर्षों में नदियां और पर्यावरण दोनों बर्बाद हो जाएंगे। ग्रामीणों ने सरकार से कड़े कदम उठाने और जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई की मांग की है।
Author: news24jharkhandbihar
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