बड़कागांव के महटिकरा में जय राम महतो ने किया जनसभा को संबोधित

एक नजर रखो खेत खलिहान में दूजी नजर रखो लाल किला के मचान में।जयराम महतो

बड़कागांव।जल ,जंगल, जमीन बचाने को लेकर भारत के पांचवें प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह ने कहा था” एक नजर रखो खेत खतियान में ,दूजी नजर रखो लाल किला के मचान में” अर्थात खेत खलिहान को बचाने के लिए हमेशा खेत खलिहान को सुरक्षा करें ,बाहरी कंपनी व कोल कंपनियां आप की जमीन छीन ना लेगी. एवं लाल किला के मचान का अर्थ है विधानसभा और लोकसभा में नज़र रखे.उक्त बातें 1932 के खतियान का आंदोलन करने वाले नेता जयराम महतो ने बड़कागांव के ग्राम महटिकरा में जनसभा को संबोधित कर रहे थे .यह जनसभा झारखंडी भाषा खतियान संघर्ष समिति द्वारा आयोजित की गई थी .जय राम महतो ने आगे यह भी कहा कि अलग राज्य के लिए कई महापुरुषों ने जान गवा दिया ,23 साल बाद भी झारखंड की सूरत नहीं बदली .एनडीए की सरकार में भी जल जंगल जमीन को को बेचा गया. और अब वर्तमान सरकार के राज में भी जल जंगल जमीन को बेचा जा रहा है .इसलिए अब हम सबको जल जंगल जमीन को बचाने की आवश्यकता है . इसके लिए नहीं लड़ेंगे तो आने वाला समय में भीख मांगना पड़ेगा . यह लड़ाई आपके गोद में खेलने वाले बच्चों के भविष्य का है.उन्होंने यह भीबकहा कि गोंदलपुरा के रैयत कई माह से आंदोलन कर रहे हैं. लेकिन आज तक उनकी सुधी नहीं ली गई है. धनबाद में 40- 50 साल पहले विस्थापित हो गए लोग . लेकिन धुआं और प्रदूषण का मुआवजा नहीं मिला. वहां की जनता आज सड़क पर है इस तरह की समस्या बड़कागांव में नहीं आने दे. जय राम महतो ने आगे कहा कि हमारे माता-पिता साग सब्जी एवं जेवर बेचकर पढ़ाते दिखाते हैं, लेकिन नौकरी चाकरी नहीं मिलती .इसका मुख्य कारण है गलत तरीके से नियोजन नीति बनाना .उन्होंने यह भी कहा कि भारत के झारखंड में ही कोयला नहीं निकलता है, बल्कि मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उड़ीसा, मणिपुर जैसे अन्य राज्यों में भी कोयला निकला है .लेकिन वहां जमीन के बदले जमीन एवं नौकरी मिली है. झारखंड में जमीन के बदले जमीन व नौकरी नहीं मिलती है .इसकी लड़ाई हम सभी को लड़नी है. पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी बंगाल के सिंगुर में टाटा नैनो के विरुध्द संघर्ष की और मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने एक हजार एकड़ रैयतों को जमीन वापस दिलाया .झारखंड की एक भी विधायक व मंत्रीरैयतों को जमीन वापस नहीं लौटा पाया. लेकिन झारखंड में गलत नीति चल रही है. हमें इस नीति के खिलाफ संघर्ष करना है .ताकि यहां एक नहीं सौ आदमी अमीर बने. जयराम महतो ने आगे संबोधित करते हुए कहा कि भारत के प्रधानमंत्री विदेशों में जाकर पर्यावरण दिवस पर पर्यावरण बचाने की बात करते हैं, लेकिन भारत में आकर पर्यावरण को अनदेखा कर कोयला आधारित उद्योग खोलते हैं. जबकि जर्मनी एवं अन्य देशों में कोयला आधारित उद्योग बंद हो गया है

.उन्होंने कहा कि केंद्र की सरकार अडानी जैसे अन्य कंपनियों को जमीन देने में लगी हुई है. झारखंड में 740 मेगावाट बिजली उत्पादन होती है .लेकिन इसका लाभ बांग्लादेश को मिलता है .इसके बदले में राज्य सरकार को रॉयल्टी 1% मिलती है. कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रीतम महतो ने किया. जबकि संचालन राजकिशोर चौधरी ने किया .मौके पर बड़कागांव ,महाटिकरा, सिकरी ,जमनी डीह ,चमगढ़ा समेत अन्य गांव के 3000 लोग जुटे हुए थे. ज्ञात हो कि जयराम महतो को सभा को संबोधित 2:00 अपराहन पहुंचना था लेकिन विभिन्न कार्यक्रमों के कारण वे देर से 5:00 बजे महटिकरा पहुंचे. बड़कागांव में जयराम महतो का यह दूसरा कार्यक्रम था.

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Author: news24jharkhandbihar

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