महुआडांड़(लातेहार)। जन्मआष्ट्मी का त्यौहार लातेहार जिला के महुआडांड़ प्रखंड में धुमधाम वा हर्षोल्लास के मनाया गया। प्रखंड के रामपुर स्थित मां शीतला मंदिर में यदुवंशी समाज के लोगों ने परम्परागत तरीके से भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव पर रतजगा करते हुए कीर्तन भजन किए। बुद्धिजीवियों के द्वारा भगवान श्री कृष्ण के जीवनी पर विस्तारित रूप से जानकारी दी गयी.
जन्माष्टमी का पौराणिक इतिहास
हिंदू पौराणिक कथाओं के मुताबिक विष्णु के आठवें अवतार भगवान कृष्ण देवकी और वासुदेव के पुत्र का जन्म मथुरा के राक्षस राजा कंस को नष्ट करने के लिए जन्माष्टमी पर हुआ था। कंस, देवकी का भाई था। राक्षस राजा ने अपनी बहन और उसके पति को पकड़ लिया था और उन्हें जेल में डाल दिया था ताकि वह उनके 7 वें बेटे को भी मार सके। देवकी के आठवें बच्चे कृष्ण का जन्म हुआ। जिसे वासुदेव ने रातो रात वासुदेव ने बच्चे को वृन्दावन में नंद बाबा और यशोदा के घर पहुंचा दिया। आदान-प्रदान करने के बाद, वासुदेव एक बच्ची के साथ महल में लौट आए और उसे कंस को सौंप दिया। जब दुष्ट राजा ने बच्ची को मारने की कोशिश की, तो वह दुर्गा में बदल गई और उसे उसके विनाश के बारे में चेतावनी दी। इस तरह कृष्ण वृन्दावन में बड़े हुए और बाद में अपने मामा कंस का वध किया। भगवान कृष्ण के जन्म को जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है।
जन्मआष्टमी कार्यक्रम के मौके पर यादव महासभा के अध्यक्ष मोहन यादव, युवा प्रखंड अध्यक्ष मुकेश यादव, उपाध्यक्ष विनय यादव, सचिव शंकर यादव, प्रेम यादव, विवेक यादव व प्रखंड के यादव समाज का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
Author: news24jharkhandbihar
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