अनिल कुमार माली/ केरेडारी
ब्रह्माकुमारीज आश्रम में रक्षाबंधन के उपलक्ष्य में एस एस+2 उच्च विद्यालय के शिक्षकों को राखी बांधी गई। ब्रह्माकुमारी सरिता बहन ने शिक्षकों को रक्षाबंधन का आध्यात्मिक अर्थ बताते हुए कहा कि आज सिर्फ बहनों को ही नही बल्कि पूरे मानव समाज को बुराइयों, व्यसनों से रक्षा की आवश्यकता हैं। जो एक आध्यात्मिक शक्ति से ही संभव है। रक्षा बंधन न सिर्फ शारीरिक रक्षा के लिए बल्कि मानसिक रक्षा के लिए भी मनाया जाता है। रक्षा सूत्र बांधने के साथ-साथ इस पर्व की दो रस्में और भी हैं।
एक है मस्तक पर तिलक लगाना और दूसरा है मुख मीठा कराना। तिलक वास्तव में आत्म-स्मृति का प्रतीक है कि हम सभी शरीर रूपी कुटिया की भ्रकुटी में स्थित चेतन, दिव्य आत्मा हैं और मुख मीठा कराने के पीछे भाव है कि हम सभी को सदा मीठे वचन बोलें। हमारे बोल-चाल और व्यवहार में कहीं भी कड़वाहट ना हो। अतः रक्षा बन्धन प्यारा बन्धन है जो मनुष्य आत्माओं को सब बन्धनों से मुक्त कर देता है।
मौके पर सरिता बहन, योगेंद्र, यशोदा माता , शिक्षक सुरेश, श्रवण, राजेश, मनोज उपस्थित थे।
Author: news24jharkhandbihar
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