विजय शर्मा
टंडवा( चतरा)। अप्रैल माह में बढ़ती तापमान ने जलापूर्ति की पोल खोल कर दी है। गर्मी के मौसम में टंडवा प्रखंड क्षेत्र में पेयजल एवं विधुत आपूर्ति का संकट गहराने लगा है। पेयजल एवं विधुत आपूर्ति की समस्या से इंसान तो इंसान जानवरो का भी जीना मुश्किल हो गया है। हजारीबाग से आने वाली बिजली का अनियमित आपूर्ति वा आंख मिचौली का खेल से लोग त्राहिमाम करने पर मजबूर है। वही दूसरी तरफ तीखी धूप में जानवरो को भी पीने का पानी मिलना अब दूर दूर तक दिखाई नही पड़ रहा है। नदी तालाब अधिकतर सुख चुके है। जनवरो को हरा चारा तक नहीं मिल पा रहा है, विचरण करते जानवर सुखी हुई घास से अपनी भूख मिटा रहे है। आम आवाम पानी एवं बिजलीं के लिए हाहाकार मचा रहे है वही पशु पक्षियों को भी पानी के लिए तड़पते हुए देखा जा सकता है।
24 घण्टे में मात्र 2 से 3 घंटा ही बिजली मिल रहा है टंडवा को। तीखी गर्मी में नदारत बिजलीं 24 घण्टे में मात्र दो तीन घण्टे भी मुश्किल से रह पाती है। बिजलीं और पानी की जटिल समस्या पर आवाम के साथ साथ जानवरो के लिए यह क्षन काफी कठिनाई भरा दिखने लगा है। ऐसे में टंडवा की जनता का रोष परियोजनाओं पर दिखने लगा है। स्थानीय लोगो का कहना है टंडवा में स्थापित परियोजनाओं को यहां के विस्थापित एवं प्रभावित इलाकों में पीने का पानी का समुचित व्यवस्था करवानी चाहिए जो कही जमीन पर दिखाई नही देता। सबसे बुरा हाल एनटीपीसी एवं सीसीएल की मगध आम्रपाली विस्थापित क्षेत्रो का है। जहां पीने का पानी के लिए अधिकतर आबादी गंदे नदी के चुए का पानी पर निर्भर है। वही प्रखंड क्षेत्र के अधिकतर चापानल का जल स्तर नीचे चले जाने के कारण लोगो को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
Author: news24jharkhandbihar
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