बड़कागांव संवाददाता कुलदीप कुमार
कर्णपुरा महाविद्यालय के सेमिनार हॉल में प्राचार्य डॉक्टर कीर्तिनाथ महतो के निर्देशानुसार प्रेमचंद की जयंती पर हिंदी विभाग की ओर से सेमिनार का आयोजन किया गया। जिसका विषय- “प्रेमचंद के साहित्य में किसानों की समस्या” रखा गया। सेमिनार का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।
मंच का संचालन हिंदी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. अन्नु कुमारी के द्वारा किया गया। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई 1880 में वाराणसी के लम्ही नामक गांव में हुआ था।
इनके 300 से भी अधिक कहानियाँ एवं उपन्यासों में यथार्थवादी चित्रण मिलता है।प्रेमचंद के साहित्य में किसानों की मुख्य समस्याएं -जमींदारी प्रथा, नौकरशाही शोषण ,कर्ज की अन्तहीन दास्ता आदि का यथार्थवादी चित्रण किया गया है। “गोदान” में ग्रामीण भारत का यथार्थ चित्रण मिलता है। “कर्मभूमि” में किसानो की मुख्य समस्याएं भारी लगान ,सूदखोरी और जमींदारों द्वारा शोषण है। “बलिदान” कहानी में महाजनों और जमींदारी व्यवस्था के कारण किसानों के शोषण को उजागर किया गया है। किसान के लिए उसकी जमीन सिर्फ मिट्टी ही नहीं बल्कि उसकी प्रतिष्ठा और प्राण होती है। प्रो.ज्योति जलधर ने कहा कि प्रेमचंद की लगभग सभी उपन्यासों एंव कहानियों में गरीबी, जमींदारी प्रथा, लगान, कर्ज आदि का चित्रण मिलता है। हिंदी विभाग की डॉ.ललिता कुमारी ने कहा कि प्रेमचंद ने गोदान, गबन, रंगभूमि,कर्मभूमि आदि उपन्यास लिखें जिसमें किसानों की समस्याओं का चित्रण किया गया है। “पूस की रात” में किसानों की मार्मिक स्थिति को दर्शाया गया है।सेमिनार का समापन डॉ. निरंजन प्रसाद नीरज में धन्यवाद ज्ञापन के साथ किया । सेमिनार मे डाॅ. सुरेश महतो, प्रो. नरेश कुमार दांगी, डॉ. पवन कुमार, डॉ. रंजीत प्रसाद, प्रो.ऋतुराज दास, डॉ. दिव्या शालू, प्रो.रामकिशोर प्रसाद दांगी, प्रो.लालदेव महतो, अनीता देवी ,नेमधारी राम,सनवीर ,रेणु,मालती तथा छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।
Author: news24jharkhandbihar
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