केरेडारी। केरेडारी क्षेत्र में इन दिनों धूल प्रदूषण के नाम पर धरना–प्रदर्शन व आंदोलन की घटनाएँ तेजी से बढ़ रही हैं। जिस से स्थानीय स्तर काम कर रहे कंपनियों पर दबाव बना कर आर्थिक शोषण किया जाता हैं। और वहीं आंदोलन के कारण अन्य गरीब परिवार सुविधाओं से वंचित हो जाते हैं।
हाल ही केरेडारी परियोजना क्षेत्र में बेंगवरी के कुछ ग्रामीणों ने धूल प्रदूषण, कोयला परिवहन और अन्य समस्याओं को लेकर अनिश्चितकालीन धरने की घोषणा की है। महिला संगठन मोर्चा समिति, बेगवरी के नाम थाने में आंदोलन में सुरक्षा की मांग की हैं। पत्र में काजल कुमारी और फुलमती कुमारी के नाम का उल्लेख है। पत्र में धरना दे रही महिलाओं को सुरक्षा देने तथा जिन लोगों के खिलाफ मामले दर्ज हैं, उन्हें वापस लेने की मांग की गई है। बताते चले कि उक्त संगठन के द्वारा विभिन्न मांगो को लेकर बीते कई सालों से आंदोलन करती रही हैं। आंदोलन में एनटीपीसी प्रबन्धन से स्पष्ट रूप से कहा कि पॉल्यूशन के नाम से कोई राशि ग्रामीणों को नहीं दिया जायेगा। हालांकि कंपनी पॉल्यूशन को रोकने के लिए पानी छिड़काव का कार्य कर रही हैं। आगे एनटीपीसी केरेडारी परियोजना प्रबन्धन ने बताया कि कई बार नौकरी, प्रदूषण मुआवजा या स्थानीय अधिकारों के नाम पर कंपनियों के खिलाफ आंदोलन खड़े किए जाते हैं। कंपनियों पर दबाव बनाकर आर्थिक लाभ लेने की कोशिश भी की जाती है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह तरीका धीरे-धीरे नई तरह की ‘हफ्ता वसूली’ का रूप लेता जा रहा है।
आगे बताया ऐसे असामाजिक और ब्लैकमेलिंग प्रवृत्ति वाले आंदोलनों की वजह से प्रतिदिन करोड़ों रुपये के राजस्व की हानि झारखंड राज्य तथा केंद्र सरकार को निरंतर हो रही है। इससे क्षेत्र की औद्योगिक गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
Author: news24jharkhandbihar
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