सूरज कुमार /महुआ डांड
पहाड़ी नगरी नेतरहाट की आबोहवा सालों भर खुशगवार रहती है। नेतरहाट की जलवायु नाशापती के फलों के काफी उपयुक्त है। नेतरहाट की नासपाती बागान से सरकार को प्रति वर्ष लाखों रूपये की आमदनी होती है। इस वर्ष नासपाती बगान की नीलामी 50 लाख 32 हजार रूपये में की गयी है। सेक्टर तीन की नीलामी 27.2 लाख व सेक्टर चार के बगान की नीलामी 23 लाख 11 लाख रूपये में की गयी है।
रांची से होती है नाशपाती बागान की नीलामी
प्रति वर्ष रांची स्थित संयुक्त कृषि निदेशक कार्यालय से नाशपाती बागान की नीलामी की जाती है। इस वर्ष 50.32 लाख रूपये में नाशपाती बागान की नीलामी हुई हैm जबकि गत वर्ष नाशपाती बागान की नीलामी 50 लाख में वर्ष 2020-21 में 44.20 लाख रूपये में नीलामी हुई थी। 2019-20 में नाशपाती बागान की नीलामी नहीं हो पायी थी। वर्ष 2018-19 में नाशपाती बागान की नीलामी 46 ला रूपये में हुई थी। वर्ष 2014-15 में 5.65, वर्ष 2015-16 में 14.85 और वर्ष 2017-18 में नासपाती बागान की नीलामी 27.60 लाख रूपये में हुई थी।
पांच हजार से अधिक नासपाती के पौधे हैं
कृषि विभाग के द्वारा वर्ष 1982-83 में प्रयोग के तौर पर यहां नाशपाती के पौधे लगाये गये थे और यह प्रयोग काफी सफल रहा था। इसके बाद वर्ष 1999 में नाशपाती की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए वृहत रूप में 450 एकड़ भूमि पर नाशपाती के पौधे लगाये गये। वर्ष 2004-05 में इस बगान का विस्तारीकरण किया गया। एक अनुमान के अनुसार यहां पांच हजार से अधिक नासपाती के पेड़ हैं. विस्तारीकरण के बाद नेतरहाट राज्य का सबसे बड़ा नाशपाती उत्पादक क्षेत्र बन गया। प्रति वर्ष जुलाइ व अगस्त महीने में प्रति दिन एक से दो क्विंटल से अधिक नाशपाती के फल पेड़ों से टुटते हैं। यहां की नाशपाती की गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय स्तर की है. यही कारण है कि इसकी मांग पड़ोसी राज्य बंगाल और बिहार के अलावा महाराष्ट्र एवं दिल्ली में भी खूब है।
Author: news24jharkhandbihar
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